दर्शनीय स्थल

दिल्ली में मौसम: दिल्ली में गर्मी अप्रैल के प्रारम्भ में सुरु हो जाती है तथा मई में पुरे जोरों पर होती है, जब औसत तापमान 32 डिग्री से० (90 डिग्री फा०) के आस-पास होता है | यद्यपि कभी कबार पारा 45 डिग्री से० (114 डिग्री फा०) के पास पहुच जाता है जो उस समय का अधिक तापमान होता है | मॉनसून जून के अंत में प्रारम्भ होता है तथा यह मध्य सितम्बर तक चलता है | मॉनसून की बारिश लगभग 797.3 मिलीमीटर (31.5 इंच) होती है | दिल्ली का औसत तापमान लगभग 25 डिग्री से० (78 डिग्री फा०) तथा शुष्क दिवसों में 32 डिग्री से० (90 डिग्री फा०) हो सकता है | सितम्बर के अंत में मॉनसून वापस लौट जाता है तथा मॉनसून के बाद की बारिश अक्टूबर के अंत तक चलती है, जब औसत तापमान 29 डिग्री से० (85 डिग्री फा०) से गिरकर 21 डिग्री से० (71 डिग्री फा०) तक चला जाता है |

दिल्ली में सर्दी नवम्बर के अंत अथवा दिसम्बर के प्रारंभ में शुरू होती है तथा जनवरी में यह अपने पुरे सवाब पर होती है | तब औसत तापमान लगभग १२-१३ डिग्री से० (५४-५५ डिग्री फे०) पहुच जाता है | यद्यपि दिल्ली की शर्दी आमतौर पर बहुत सुहावनी होती है परंतु दिल्ली के हिमालय के निकट होने के कारन शीत लहर चलने से पारा गिर जाता है तथा काफी शर्दी बढ़ जाती है | शर्दी के मौसम में दिल्ली अत्यधिक ढूंढ पड़ने के लिए विख्यात है | दिसम्बर में दृश्यता काम होने के कारन सड़क, वायु तथा यातायात मार्ग में बाधा आती है | यह फरवरी के प्रारम्भ में सम्पात हो जाती है तथा गर्मी के प्रारम्भ तक बसंत की बहार रहती है |

  • इंडिया गेट

    इस स्मारक का निर्माण प्रथम विष्वयुद्ध में मारे गए 70,000 भारतीयों सैनिको की याद में किया गया | इंडिया गेट की बनावट सर एडविन लुट्येन्स द्वारा तैयार किया गया तथा यह 1931 में तैयार हुआ |

    इसका निर्माण भूरे पत्थर से किया गया है तथा इसकी वृत्त चाप में अमर ज्योति है | यह उन भारतीय जवानों की याद का प्रतिक है जिन्होंने पाकिस्तान के साथ 1971 की लड़ाई में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया |

  • राष्ट्रपति भवन

    पूर्व में यह राजप्रतिनिधि का आवास था | यह भवन लुट्येन्स नई दिल्ली स्थित भवनों में स्रवश्रेष्ठ है तथा इसका निर्माण कार्य १९२९ में १२,५३,००० पौंड की लगत से पूरा किया गया | यह १३० हैक्टर में फैला हुआ है तथा इस महलनुमा भवन में ३४० कक्ष है |

  • लाल किला

    लाल पत्थर से बने होने के कारण इसका नाम लाल किला पड़ा | लाल किला विश्व के भव्य महलों में से एक हैं | यह भारत के इतिहास से भी बहुत निकट से जुड़ा हुआ है | यह इस बात का साक्ष्य है की अंग्रेजों ने ३०० साल के मुग़ल साम्राज्य का अंत करते हुए अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुर शाह जफ्फर को उनकी गद्दी से पदच्युत किया | इसी लाल किले की प्राचीर से भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देश को संबोधित करते हुए कहा था की भारत उपनिवेश साम्राज्य से आज़ाद हो चूका है |

  • कुतुब मीनार

    कुतुब मीनार का उद्भव विवादों में घिरा है | कुछ का विश्वास है की इसे भारत में मुग़ल साम्राज्य के प्रारंभ के संकेत के रूप में विजय स्तम्भ के रूप में स्थापित किया गया था | जबकि अन्य का कहना है की मुइज़्ज़िन्स इस मीनार पर चढ़ कर अजान देकर नवाजियों को बुलाते थे | परंतु इस बात पर कोई विवाद नहीं है की यह मीनार न केवल भारत के सर्वश्रेठ स्मारकों में से एक है बल्कि यह विश्व के स्मारकों में शुमार है |

  • जंतर-मंतर

    जंतर-मंतर सरासरी तौर पर आधुनिक कला की एक दिर्घा के रूप में दिखाई देता है | परंतु यह एक वेदशाला है | जयपुर के सवाई जिया सिंह II (1699-1743) एक प्रखर खगोलविद तथा मुग़ल न्यायालय में ऊँचे ओहदे पर आसीन पीतल तथा धातु खगोलीय यंत्रो के त्रिटियों से अशंतुष्ट थे |

  • राजघाट

    यहाँ 31 जनवरी 1948 की सायं को यमुना नदी के पश्चिमी तट पर इस स्थान पर महात्मा गाँधी का अंतिम संस्कार किया गया था |

  • लक्ष्मी नारायण मंदिर

    इस मंदिर का निर्माण १९३८ में किया गया | यह मंदिर भारत के सर्वदेव मंदिर के कुछ देवताओं का एक आदर्श परिचय है | मंदिर में अनेक मूर्तियां है तथा दर्शक यहाँ आकर पुजारियों को धार्मिक अनुष्ठान करते हुए देख सकते है |